नरेंद्र मोदी जी भगवान का एक स्वरूप

एक सांस्कृतिक और राजनितिक विश्लेषण 
प्रिय पाठको नमस्कार!
इस ब्लॉग में आपका स्वागत है। हमारा आज का विषय देश के यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के बारे में कुछ इस प्रकार से है। जिसका शीर्षक है "नमो भगवान का एक स्वरूप "
एक ऐसा विचार जो भारत की राजनीति में बहुत गहराई से जुड़ा हुआ है। जिसमें भारत के प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी की तुलना भगवान के एक रूप से की गई है। कुछ लोग नरेंद्र मोदी जी को भगवान का अवतार या दैवीय व्यक्तित्व मानते हैं। इस ब्लॉग में हम इस धारणा की जड़ें और ऐतिहासिक संदर्भ, समर्थकों और आलोचकों के विचारों को तथ्य आधारित तरीके से समझने का प्रयास करेंगे।
यह एक निष्पक्ष विश्लेषण माना जाएगा। न कि किसी राजनितिक दृष्टिकोण का समर्थन, तो जानेंगे कि क्यों इतने खास और प्रिय माने जाते हैं ।हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी।
नेताओं में दैवीय छवि देखने की परंपरा भारत का एक इतिहास है। 
अगर हम बात महात्मा गांधी जी की करें तो उन्हें महात्मा कहा गया। जो की महान आत्मा से परिभाषित होता है। जवाहरलाल नेहरू को चाचा नेहरू के नाम से आदर्शीकृत किया गया। लेकिन नरेंद्र मोदी जी के समय में यह धारणा और ज्यादा बढ़ गई। खासकर हिन्दू राष्ट्रवाद के मुद्दे को लेकर। कुछ लोग उन्हें भगवान विष्णु का अवतार मानते हैं। 
नमो शब्द संस्कृत से आता है। जो नमो भगवते वासुदेवाय में प्रयोग किया जाता है। ओम नमो नारायण जैसे हिंदू धर्म के मंत्र में जपने वाला नाम, 2014 में तत्कालीन गोवा के मुख्यमंत्री स्व० श्री मनोहर पारिकर जी ने नमो नाम को हिंदू धर्म के दैवीय संदर्भ में जोड़ा था जिस से मोदी जी की छवि ज्यादा बढ़ गई थी।


समर्थकों का क्या मानना है: काफी समय के बाद जब 2014 में भाजपा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ केंद्र में सत्ता में आई जिस से भाजपा समर्थकों को बहुत ज्यादा खुशी हुई। और देश की बागडोर प्रधानमंत्री पद पर संभाली श्री नरेंद्र मोदी जी ने इसके बाद वह लगातार तीन बार प्रधानमंत्री पद पर रहे अबतक। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री पद पर सबसे ज्यादा लगातार 4078दिनों तक बने रहने का गौरव प्राप्त किया।
हिंदू धर्म से संबंधित विभिन्न मुद्दों को आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के द्वारा सुलझाया गया। जैसे राम मंदिर मुद्दा हो या भारत की संस्कृति से जुड़े अन्य विलुप्त होते त्यौहार,रीति रिवाज, मंदिर संरक्षण व अन्य धार्मिक स्थानों की यात्राएं तथा देश की जनता में धर्म के प्रति भावना जगाने जैसे अनेक कार्य पूर्ण किए गए।
जिसके चलते वह अपने समर्थकों के द्वारा काफी ज्यादा पसंद किए जाते हैं।
आलोचकों का मानना : आलोचक इन सभी कार्यों को राजनीतिक लाभ के लिए एक मुद्दा मानते हैं। वे राम मंदिर के उद्घाटन को राजनीति का लाभ उठाने का कारण मानते हैं। वे तर्क देते हैं कि भारत धर्म निरपेक्ष के मूल्यों से जुड़ा है। यहां कोई व्यक्ति धर्म की आड पर काम नहीं कर सकता। जब भी मोदी जी उत्तराखंड में केदार नाथ मंदिर की यात्रा हो या जगन्नाथ भगवान की यात्रा करें। आलोचक इसे राजनीति से जोड़ते हैं। उन पर गम्भीर आरोप लगाए गए लेकिन जो बाद में गलत साबित हुए। तब आलोचकों को अपना और ज्यादा अपमान झेलना पड़ता है।
निष्कर्ष: नरेंद्र मोदी जी को भगवान का स्वरूप बताना एक सांस्कृतिक घटना के आधार पर कहा जा सकता है। लेकिन वह एक मनुष्य होने के नाते एक संदेश सभी को देते हैं।जिसमें सभी जीवों के प्रति प्रेम भावना व अन्यों वर्गों के प्रति आदर और सत्कार का भाव प्रकट करते है।हां वह वास्तव में एक युग पुरुष है। 
लेख जारी रहेगा...।
धन्यवाद्। Vijay ks9



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